रिपोर्टर: सतीश द्विवेदी, राष्ट्रीय शान न्यूज, गाजियाबाद
दिल्ली पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में चार बांग्लादेशियों सहित सात आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गैंग डायलसिस कराने वाले मरीजों को बांग्लादेश में ढूंढता था और सस्ते इलाज का लालच देकर भारत लाकर उनका पासपोर्ट छीन लेता था। इसके बाद, उन्हें वापस भेजने के नाम पर उनकी किडनी निकालकर रिसीवर को 20-22 लाख रुपये में बेच देता था। इस काले कारोबार के बदले डोनर को केवल साढ़े तीन लाख रुपये देकर चुप कर दिया जाता था।
गैंग का खुलासा और गिरफ्तारियाँ
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने इस रैकेट का खुलासा करते हुए दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल की पूर्व विजिटिंग कंसल्टेंट डॉ. विजया राजकुमारी को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही, उनके असिस्टेंट विक्रम, और अन्य आरोपी रसेल, मोहम्मद सुमन मियां, मोहम्मद रोकोन, रतेश पाल, और शरीक भी पकड़े गए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गैंग लंबे समय से इस गैरकानूनी गतिविधि में संलग्न था और कई गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
गैंग की कार्यप्रणाली
यह गैंग बांग्लादेश में डायलसिस कराने वाले मरीजों को टार्गेट करता था। उन्हें सस्ते इलाज का लालच देकर भारत लाया जाता था और उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे। इसके बाद, उन्हें वापस भेजने का वादा किया जाता था, लेकिन पहले उनकी किडनी निकाल ली जाती थी। इन किडनियों को फिर 20-22 लाख रुपये में रिसीवर को बेच दिया जाता था। वहीं, डोनर को केवल साढ़े तीन लाख रुपये देकर इस पूरे मामले को दबा दिया जाता था।
पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस को इस रैकेट के बारे में एक गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की। काफी मेहनत और प्रयासों के बाद पुलिस ने इस गैंग के मुख्य सदस्यों को पकड़ने में सफलता हासिल की। पुलिस ने इस ऑपरेशन के तहत कई छापेमारी की और कई सबूत जुटाए, जिससे इस रैकेट का पर्दाफाश हो सका।
डॉ. विजया राजकुमारी की भूमिका
इस रैकेट में दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल की पूर्व विजिटिंग कंसल्टेंट डॉ. विजया राजकुमारी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। पुलिस के अनुसार, डॉ. विजया राजकुमारी इस पूरे गैंग की मास्टरमाइंड थीं और उन्होंने ही इस गैरकानूनी कारोबार को संचालित किया था। उनके असिस्टेंट विक्रम ने भी इस अपराध में उनका पूरा साथ दिया।
बांग्लादेशी आरोपियों की भूमिका
रसेल, मोहम्मद सुमन मियां, मोहम्मद रोकोन, और शरीक इस गैंग के बांग्लादेशी सदस्य थे, जो बांग्लादेश में डायलसिस कराने वाले मरीजों को टार्गेट करते थे। वे इन मरीजों को सस्ते इलाज का लालच देकर भारत लाते थे और यहां उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे। इसके बाद, उनकी किडनी निकालकर बेची जाती थी और डोनर को चुप कराने के लिए उन्हें साढ़े तीन लाख रुपये दिए जाते थे।
आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट के और कौन-कौन सदस्य हो सकते हैं और उन्होंने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
समाज में जागरूकता की आवश्यकता
यह घटना समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को भी उजागर करती है। लोग अक्सर सस्ते इलाज के लालच में आकर ऐसे गैरकानूनी कामों का शिकार हो जाते हैं। इसलिए, लोगों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी सस्ते इलाज के प्रस्ताव को बिना पूरी जानकारी के स्वीकार नहीं करना चाहिए।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया है और यह उम्मीद की जा रही है कि इस कार्रवाई से इस प्रकार के गैरकानूनी कारोबार पर रोक लगेगी। पुलिस की इस साहसिक और महत्वपूर्ण कार्रवाई की सराहना की जानी चाहिए और इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।